SEBI Investor Complaints Update | Rs 1,000 Fine Daily If Companies Fail To Redress Investor Complaints | कंपनियों ने निवेशकों की शिकायतों का तय समय में निपटारा नहीं किया तो रोजाना 1,000 रुपए का लगेगा जुर्माना

यह नियम उन कंपनियों पर लागू नहीं होगा जिन कंपनियों को वाइंड अप या इनसालवेंसी के तहत उनके खिलाफ मोराटोरियम ऑर्डर पास किया जाता है

  • सेबी ने एक आदेश में कहा है कि एक सितंबर से यह नियम लागू होगा
  • स्टॉक एक्सचेंज को इसपर ध्यान देना होगा, ताकि निवेशकों की शिकायतें दूर हों

पूंजी बाजार नियामक सेबी ने निवेशकों के लिए एक नई राहत दी है। अगर कोई कंपनी निवेशकों की शिकायत का निपटारा तय समय में नहीं करती है तो उस पर रोजाना एक हजार रुपए का जुर्माना लगेगा। लिस्टेड कंपनियों और स्टॉक एक्सचेंज द्वारा शिकायत प्रबंधन की प्रक्रिया को परिभाषित किया गया है।

शेयर होल्डिंग को डिपॉजिटरीज फ्रीज भी कर सकते हैं

सेबी के मुताबिक, स्टॉक एक्सचेंज निर्धारित समय के भीतर निवेशकों की शिकायतों को दूर करने में विफल रहते हैं तो इसके लिए उस लिस्टेड कंपनी पर प्रति शिकायत प्रति दिन 1,000 रुपए का जुर्माना लगेगा। इसका पालन न होने की स्थिति में प्रमोटर्स की पूरी शेयरहोल्डिंग को डिपॉजिटरीज फ्रीज भी कर सकते हैं। सेबी का यह नियम एक सितंबर से लागू होगा। सेबी ने अपने सर्कुलर में कहा है कि कंपनियों को इस तरह की शिकायत मिलने से 30 दिन के भीतर निवेशकों की शिकायतों का समाधान होना चाहिए।

यदि कंपनी ऐसा करने में विफल रहती है, तो ऐसी सीधी शिकायतें स्कोर के माध्यम से स्टॉक एक्सचेंज को भेज दी जाएंगी।

कंपनी शिकायत नहीं सुलझा पाई तो रिमांडर मिलेगा

सर्कुलर में कहा गया है कि लिस्टेड कंपनियों द्वारा 60 दिनों से अधिक लंबित निवेशकों की शिकायतों के निपटान में किसी भी विफलता के लिए स्टॉक एक्सचेंज प्रतिदिन 1,000 रुपए का जुर्माना लगाएगा। यदि लिस्टेड कंपनी जुर्माने का भुगतान करने में विफल रहती है और/या 15 दिनों के भीतर शिकायत का समाधान करती है, तो स्टॉक एक्सचेंज 10 और दिनों की मोहलत देने के लिए एक रिमाइंडर भेज सकता है।

समय के अंदर ही कंपनियों को यह काम करना होगा

सर्कुलर में कहा गया है कि अगर कंपनी तब भी एक्शन ली गई रिपोर्ट (एटीआर) जमा करने में विफल रहती है तो डिपॉजिटरी तुरंत प्रमोटर्स के डीमैट एकाउंट्स को फ्रीज कर देगा। पालन न करने की स्थिति में लिस्टेड संस्थाओं और शिकायतों को निपटाने के लिए टाइम लाइन दी जा रही है। स्टॉक एक्सचेंज डिविडेंड और आईईपीएफ से संबंधित शिकायतों, पेंशन फंड, मोनोपोली और प्रतिस्पर्धी विरोधी नियमों, चिटफंड, बीमा कंपनियों, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों और सिक्योरिटीज से संबंधित शिकायतों को नहीं देखेंगे, जहां कंपनियों को वाइंड अप या इनसालवेंसी के तहत उनके खिलाफ मोराटोरियम ऑर्डर पास किया जाता है।

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